- दिन रात धड़ल्ले से निकल रहे ओवरलोड वाहन
- अढ़ावल मौरंग घाट से लादे जा रहे ओवरलोड ट्रक
- संचालक ने ओवरलोड लादने का निकाला नायाब तरीका
जनपद में ओवरलोड वाहनों की वजह से कई जिंदगियां काल मे गाल में समा गई हैं ओवरलोड वाहनों के लगातार गुजरने से करोड़ों से बनी रोड़ों का भी सत्यानाश हो रहा है मगर ओवरलोड वाहनों पर लगाम लगा पाने में जिला प्रशासन की टीम विफल साबित हो रही है। रात दिन जिले से हजारों ओवरलोड वाहन गुजर जाते हैं मगर कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है वहीं हद तो तब हो जाती है जब ये वाहन शहर के अंदर घुसकर अधिकारियों के बंगलों के पीछे व बगल से मुंह चिढ़ाते हुए निकल जाते हैं। वहीं एआरटीओ की स्थिति तो सभी जानते हैं वहां एंट्री का खेल है बताते हैं कि जिसकी एंट्री है उसको खुलेआम छूट है बांकी का चालान तो होना ही है। नहीं तो इनको हजारों जाली नम्बर लिखे या मिटे ट्रक क्यों नहीं दिखाई देते हैं। हालांकि बिंदकी प्रशासन ने ओवरलोड पर कार्यवाही कर ऊंट के मुंह मे जीरा अवश्य पहुंचाया है। लेकिन जो भी हो इस समय ओवरलोड वाहनों की बढ़ोतरी का कारण जिले का एक मात्र संचालित मोरम घाट अढ़ावल दो नम्बर है जो अवैध कमाई की चक्कर मे यह गाड़ियां ओवरलोड भरवाते हैं। एक ट्रक संचालक से धर्मकांटा से ओवरलोड कैसे गुजर जाएगा पूछने पर उसने बताया, भइया यूपी में नियम बनने से पहले उसका जुगाड़ निकल आता है। उसने बताया कि धर्मकांटा के समय ट्रक में मानक के अनुसार माल भरा जाता है मगर उसके आगे बढ़ने के बाद जो जितना ओवरलोड लादना चाहता है उसकी अतिरिक्त धनराशि देकर लोड करवा सकता है। यह सुनने के बाद थोड़ा अजीब लगा लेकिन फिर महसूस हुआ कि सिस्टम का खेल है लेना सभी को है तो थोड़ा अनदेखा तो करना ही पड़ेगा। उधर ओवरलोड वाहनों की वजह से जिले की कई रोड़ों में निकलना दुश्वार हो गया है। शहर में ही राधानगर से नउआबाग जाना बीस किलोमीटर जाने से अधिक दुश्वार लगता है मगर प्रशासनिक व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते जिले के हालात बद से बद्तर होते नज़र आ रहे हैं।