आरटीओ कार्यालय में सजी दलालों की दुकाने

 


सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद कार्यालयों में भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसना मुश्किल सा साबित होता नजर आ रहा है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण आपको एआरटीओ कार्यालय में देखने को मिल जाएगा। जहां हर कार्य के बाकायदा रेट बंधे हैं जहां दलालों के माध्यम से अधिकतर कार्यों को अंजाम दिया जाता है। हालांकि हाल ही में जिलाधिकारी संजीव सिंह ने एआरटीओ कार्यालय में छापा मारकर 7 दलालों को पकड़ा था जिन पर मुकदमा पंजीकृत हुआ था। और उन सातों को जेल भेज दिया गया था। जो जमानत पर बाहर आकर फिर एआरटीओ कार्यालय में दलाली में जुट गए हैं साथ ही एआरटीओ कार्यालय में दलालों की मंडी पूरी तरह फिर सज चुकी है। यहां के कई बाबू तो ऐसे हैं जिनकी अवैध संपत्ति देखी जाए तो करोड़ों में निकलेगी। मोदी सरकार भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए प्रयासरत है मगर जिले के एआरटीओ कार्यालय में उसका कोई खास असर नहीं है। जिलाधिकारी ने भी छापा मारने के बाद दलालों पर तो कार्यवाही की लेकिन इस व्यवस्था को जन्म देने वाले संबंधित बाबूओ पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की है वही कार्यालय के मुखिया की आज तक कोई जवाबदेही नहीं तय की गई है जिससे आम आदमी का काम होना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। एआरटीओ कार्यालय में बिगड़ी व्यवस्था का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है जब देश के लिए युद्ध लड़ने वाले सैनिक को ही लाइसेंस नहीं जारी किया जा रहा है कार्यालय के लोगों को कहना है की अपंग होने की वजह से आपको वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं निर्गत किया जा सकता जबकि युद्ध में विकलांग सैनिकों के लिए पुनर्वास एवं कल्याण अनुभाग द्वारा भारतीय सेना व वेटरेन्स निदेशालय में गतिशील उपकरण कार का संशोधन/संशोधित ऑटो स्कूटर चलाने के लिए अनुदान मुहैया कराती है जिसे वाहन चलाने के लिए लाइसेंस एआरटीओ जारी करता है। इसी प्रकार सर्कुलर नंबर 3 (8) की धारा 1988 व एन ए आर आई तकनीशियन पुणे से जारी लेटर तथा चिकित्साधिकारी के द्वारा जारी प्रमाण पत्र जिसमें स्पष्ट शब्दों में अंकित है कि दिव्यांग को ऑटोमेटिक गाड़ी चलाने का लाइसेंस निर्गत किया जा सकता है। ग्राम पड़री जनपद फतेहपुर के रहने वाले पूर्व नायक रामनरेश जो युद्ध विजई हैं। युद्ध में ही गोली लगने से एक हाथ काम करना बंद हो गया है जिसकी वजह से वह दिव्यांग हो गए हैं। उन्होंने बताया कि लगातार मुझे लाइसेंस निर्गत करने के लिए 6 माह से एआरटीओ द्वारा टहलाया जा रहा है। जबकि नियम विपरीत दर्जनों काम दलालों के माध्यम से आए दिन एआरटीओ कार्यालय में होते हैं जिन्हें देखने वाला कोई नहीं है चूंकि उनसे जेब गर्म होती है मगर मेरा जायज़ काम करने में दस नियम कानून बताए जा रहे हैं जबकि लाइसेंस निर्गत करने के लिए जिलाधिकारी ने स्वयं निर्देशित किया हैl